सामाजिक बदलाव के लिए प्रतिबद्ध
गाजियाबाद। राष्ट्र को समर्पित संगठन ‘समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया’ ने छोटे-बड़े जिलों काम कर के न केवल हाशिये पर रहने वाले लोगों को सशक्त, आत्मनिर्भर व जागरूक बनाया है, बल्कि समाज के कई सामाजिक मुद्दों पर संघर्ष भी किया है। इससे सामाजिक परिवर्तन की एक नई लहर आई है। समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया को संक्षेप में एसकेएफआई भी कहा जाता है और आज पूरे देश में कार्यरत यह संगठन सामाजिक बदलाव के लिए प्रतिबद्ध है।
समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया की शुरुआत 2022 में हुई, जब देश में कोरोना वायरस की दहशत अब भी बाकी थी। इस महामारी से उबरने के लिए कुछ लोगों ने आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। ऐसे में देश के वरिष्ठ पत्रकार जितेन्द्र बच्चन को गरीबों, जरूरतमंदों और अशिक्षितों को संगठित कर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया गठित करने का विचार आया। इसके जरिये प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने, गरीब बेसहारा बच्चों को शिक्षित होने और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों को सरकारी सुविधाएं मिलने से उन्हें आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत होने का अवसर मिला।
वर्ष 2022 में पंजीकृत समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया के लक्ष्यों में महिलाओं और बेरोजगार युवकों को सामाजिक नेटवर्क से जोड़ना और नेतृत्व क्षमता विकसित करना भी है। आज इस संगठन से देश की अनेक गैर सरकारी संस्थाएं, शिक्षण संस्थान और सैकड़ों महिला-पुरुष सदस्य जुड़े हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष जितेन्द्र बच्चन ने बताया कि एसकेएफआई ने समय-समय पर कई विकास और जनकल्याणकारी योजनाएं भी शुरू की हैं। इनमें स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कार, सहकारी उद्यम एवं वृद्धा अवस्था पेंशन से जुड़ी सरकार की नीतियां शामिल हैं। इनका उद्देश्य महिला सशक्तिकरण करना और छोटे-छोटे व्यवसायों को बढ़ावा देना है।
एसकेएफआई आत्मनिर्भर बनाने और महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ देश की प्रगति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वालों को एक बेहतर मंच भी प्रदान करता है। उन्हें राष्ट्रीय प्रतिभा सम्मान से नवाजता है। विकास एवं सामाजिक समरसता संगठन का मुख्य उद्देश्य है। सामूहिक निर्णय से जरूरतमंदों की सहायता करना धर्म समझता है और सामाजिक बदलाव लाने में निरंतर अग्रसर है। कल तक देश की जो प्रतिभाएं छिपी हुई थीं, जिनकी दुनिया महज घर तक सीमित थी, वे आज समाज कल्याण फेडरेशन ऑफ इंडिया के मंच पर आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं और राष्ट्र को सशक्त बनाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। निश्चित ही एसकेएफआई का यह प्रयास हुनरमंदों के लिए जहां सम्मान का एक अच्छा उदाहरण है, वहीं प्रेरणादायक भी है।